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शनिवार, 12 जून 2010

वीरबंदा बैरागी------- मै बैरागी हू और गुरु क़ा बन्दा-------------.

         आज पूरे पंजाब में बीर बन्दा बैरागी क़ा ३०० वा विजय दिवस मनाया जा रहा है, दुर्भाग्य है कि भारत की सेकुलर (हिन्दू बिरोधी) सरकार को यह विजय पर्व दिखाई नहीं पड़ रहा है आज क़े तीन सौ वर्ष पूर्ब मई १७१० में बन्दा बहादुर की सेना ने सूबेदार वजीर खान को पराजित कर सरहिंद पर अपना अधिकार कर लिया था, गुरु गोविन्द सिंह जब दक्षिण भारत पहुचे तो नादेण में राजा लक्ष्मणरोंव उन्हें तपस्वी वेश में मिले.
     गुरुजी ने उन्हें उपदेश दिया अनाथ अबलाये तुमसे रक्षा की आशा करती है, गो माता मलेक्षो की छुरियो क़े नीचे तडपती हुई तुम्हारी तरफ देख रही है, हमारे मंदिर ध्वस्त किये जा रहे है, यहाँ किस धर्म की आराधना कर रहे हो तुम एक बीर अचूक धनुर्धर, इस धर्म पर आयी आपत्ति काल में राज्य छोड़कर तपस्वी हो जाय यह गुरु गोविन्द सिंह को अभीष्ट नहीं था.
      मै आपका बन्दा हू, लक्ष्मण ने घुटने टेक कर कहा और उसी दिन से वे सचमुच बन्दा हो गए, गुरु गोविन्द सिंह ने स्वयं उन्हें अपनी तलवार प्रदान की, बन्दा बैरागी क़ा जन्म कश्मीर क़े राजौरी गाव में एक राजपूत किसान परिवार में हुवा था सन्यासी बनने क़े पश्चात् वे माधोदास बैरागी हो गए. छद्म वेशी तुर्कों ने धोखे से गुरुगोविन्द सिंह की हत्या करायी, बन्दा को पंजाब पहुचने में लगभग एक वर्ष लग गया सभी शिक्खो में यह प्रचार हो गया की गुरु जी ने बन्दा को उनका जत्थेदार यानी सेनानायक बनाकर भेजा है देखते-देखते सेना गठित हो गयी और रावी से यमुना क़े बीच क़ा सारा भूभाग जीत कर गुरु नानकदेव व गुरु गोविन्द सिंह क़े नाम क़ा सिक्का जारी किया वे सरहिंद क़े वजीर खा से बदला लेना चाहते थे जिसने जोरावर सिंह और फ़तेह सिंह को जिन्दा दीवाल में चुनवा दिया था. चपद्चिनी क़े युद्ध में वजीर खा और उसके पुत्र को समाप्त किया, बन्दा तो बैरागी थे वे दो स्थानों पर ही मिलते थे एक समर क्षेत्र में या तो पर्वत की सिखा पर ध्यानस्थ.
       दिल्ली क़े सम्राट बहादुर साह प्रथम स्वयं सेना लेकर बन्दा क़ा सामना किया और उन्हें बंदी बनाने में सफल हो गया, लोहे की जंजीरों में जकड बन्दा बैरागी को हाथी पर ले जाया जा रहा था, सिंह को छल पुर्बक बंदी बनाया था, महायोगी बन्दा ने अपने आप को सम्हाला प्राणों को स्थिर किया और जंजीरे जिनमे वे जकड़े थे, तड-तड टूट गयी, समीप क़े यवन सैनिक क़े घोड़े उसकी तलवार लेकर अस्व की पीठ पर बैठे बन्दा अपने सभी बंदी साथियों को अकेले छुड़ा लिया हिमाचल क़े पास लौहगढ़ को उन्होंने राजधानी बनायीं लगभग ६ बर्षो तक सिक्खों क़ा शासन हुवा उन्होंने मुगलों क़े जमींदारी से सभी को मुक्त कराया, एक दुर्भाग्य क़ा दिन आया मुग़ल फूट डालने में कामयाब हो गए वे कुछ सैनिको क़े साथ दुर्ग में घिर गए दुर्ग की खाद्य सामग्री समाप्त हो गयी, बन्दा और उनके ७८४ साथी पकड़ लिए गए बन्दा को सिंह क़े पिंजरे में बंद करके हाथी पर दिल्ली भेजा गया.
        तुम इस्लाम धर्म स्वीकार लो, तुम्हे जीवन दान दिया जायेगा उन्होंने स्वीकार नहीं किया, प्रतिदिन १०० सिक्खों क़े सिर काटे जाते यह क्रम सात दिनों तक चला, उनका मस्तक गौरवमय प्रतीत हो रहा था १७१६ क़ा वह मनहूस दिन आया इस्लाम क़े नाम पर जो यह कहते नहीं थकते- कुरान प्रेम, मुहब्बत सिखाता है उनका प्रेम तो देखो बन्दा को नगर से बाहर लाया गया, बन्दा क़े सम्मुख उनके इकलौते पुत्र की छाती फाड़कर जल्लादों ने उसका कलेजा निकाल लिया और बल पूर्बक बन्दा क़े मुख में ठूसा गया, तपाई गयी गर्म सलाखों से पीटा गया जब उनका सरीर झुलस गया, तब गरम चिमटो से उनका मांस नोचा जाने लगा वे मुस्करा रहे थे सबने देखा बैरागी क़े मुख पर बेदना क़े तनिक भी चिन्ह नहीं थे, अंत में इस्लाम दया करने वाला धर्म, मुहब्बत क़े सन्देश देने वालो ने उन्हें हाथी क़े पैरो नीचे कुचलवाया. बन्दा वास्तव में गुरु क़े बन्दा थे.
       यह बिधर्मी सरकार कब चेतेगी इसे चेतना भी नहीं है आखिर सोनिया के लिए इन सारी बातो क़ा क्या महत्व है--? वह न तो देश जानती है न तो धर्म, उनका तो केवल एक ही कार्य है वह इसाई धर्म क़ा प्रचार करना ..

8 टिप्‍पणियां:

aarya ने कहा…

सादर वन्दे !
इस वीर योद्धा को कोटि कोटि नमन | वर्त्तमान की सरकार और नेता ठीक वही रास्ता अपना रहे है जो इस योद्धा के विरुद्ध अपनाई गयी थी | अंततः अब इस देश के प्रत्येक राष्ट्रवादी कोबन्दा बैरागी बनना पड़ेगा तभी वर्त्तमान के इन दुष्टों का सफाया होगा | प्रेरणा देती इस पोस्ट के लिए धन्यवाद |
जय वीर वन्दा वैरागी
जय हिंद
रत्नेश त्रिपाठी

भारतीय नागरिक ने कहा…

जय हो बन्दा बैरागी की. कहां चला गया वह जज्बा हम लोगों से. आपसे ऐसी ही प्रेरणादायक जानकारी की उम्मीद है..

संगीता पुरी ने कहा…

बीर बन्दा बैरागी के बारे में इतनी जानकारी देने का आभार बहुत प्रेरणादायक आलेख है !!

veeru ने कहा…

इस वीर योद्धा को कोटि कोटि नमन
सच में बन्दा बैरागी जी महाराणा प्रताप व वीर शिवाजी के सामान वीर योद्धा थे

"छद्म वेशी तुर्कों ने धोखे से गुरु गोविन्द सिंह की हत्या करायी "
किरपा करके इस विषय पर कुछ प्रकाश डाले
आप का बहुत बहुत धन्यवाद

अल्पना वर्मा ने कहा…

इस वीर योद्धा बन्दा बैरागी जी को कोटि कोटि नमन.
यह त्रासदी है कि इन महान वीरों के बारे में प्रचार ही नहीं किया जाता.बहुतों को मालूम भी नहीं कि कितने कष्ट सह कर यह आजादी पायी है.
इनके बारे में मुझे भी आज ही मालूम हुआ.बहुत बहुत आभार.
ऐसा लगता है स्कूलों में इतिहास ठीक से पढाया ही नहीं जाता.

अमित शर्मा ने कहा…

बीर बन्दा बैरागी के बारे में इतनी जानकारी देने का आभार बहुत प्रेरणादायक आलेख है !!

pandit rakesh arya ने कहा…

वीर बन्दा बैरागी विश्व के महान योद्धाओँ मेँ से एक थे ।एक दृष्टि से सिक्ख पन्थ के एकादशम गुरु थे ।ऐसे हिन्दु धर्मरक्षक योद्धा को हमारा कोटि - कोटि नमन ।

पंडित राकेश आर्य
ग्रा+ डा॰ - दतियाना
जनपद - मुजफ्फर नगर
उत्तर प्रदेश
चलित दूरभाष 08950108708

pandit rakesh arya ने कहा…

वीर बन्दा बैरागी विश्व के महान योद्धाओँ मेँ से एक थे ।एक दृष्टि से सिक्ख पन्थ के एकादशम गुरु थे ।ऐसे हिन्दु धर्मरक्षक योद्धा को हमारा कोटि - कोटि नमन ।

पंडित राकेश आर्य
ग्रा+ डा॰ - दतियाना
जनपद - मुजफ्फर नगर
उत्तर प्रदेश
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